गुजरात में कोन-कोन से धार्मिक स्थल हैं?

भारत के पश्चिम में स्थित गुजरात राज्य भारत के प्रमुख राज्यों  में से एक हैं।गुजरात राज्य अपनी संस्कृति,सभ्यता,विविध स्थापत्य,विविध व्यंजन आदि के लिए जाना जाता हैं।साथ ही गुजरात अनेक धार्मिक स्थलों के लिए भी जाना जाता हैं।

कई ऐसे धार्मिक स्थल मौजूद हैं जो अति प्राचीन समय से हो।इनमें से कुछ ऐसे स्थल मौजूद हैं जो यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल की सूची में शामिल हो।गुजरात भक्ति भाव के साथ साथ एक प्रख्यात पर्यटक स्थल हैं जहां काफी लोग आते हैं।स्थापत्य कला कृति के लिए विश्व प्रसिद्ध गुजरात के कुछ धार्मिक स्थल के बारे में इस लेख जानकारी प्रदान करेगे।

द्वारकाधीश मंदिर 

द्वारकाधीश मंदिर को जगत मंदिर या त्रिलोकी सुंदर मंदिर के नाम से जाना जाता हैं।ये मंदिर भगवान श्री कृष्ण को समर्पित हैं।द्वारकाधीश मंदिर गुजरात राज्य के द्वारका शहर में गोमती नदी और अरब सागर के तट पर स्थित हैं।मान्यताओं के अनुसार,द्वारकाधीश मूल मंदिर मूल रूप से भगवान श्री कृष्ण के परपोते वज्रनाभ द्वारा 2500 साल पहले बनवाया गया था।
जबकि,मंदिर की मौजूदा संरचना 15 वीं या 16 वीं शताब्दी के आसपास बनाई गई थी।

हिंदुओं के पवित्र चारधामों में से एक द्वारकाधीश मंदिर भी हैं।मंदिर में 72 स्तभ हैं और मंदिर की इमारत 5 मंजिला हैं।इस मंदिर की खास बात यह है की यह मंदिर के शिखर में 52 गज का ध्वज फहराया जाता हैं और इस ध्वज को दिन में तीन बार बदला जाता हैं।जिसे देखने के लिए कई श्रद्धालुओं आते हैं।यह ध्वज सूर्य और चंद्रमा को दर्शाता है,जो माना जाता है की श्री कृष्ण तब तक रहेंगे जब तक सूर्य और चंद्रमा पृथ्वी पर मौजूद रहेंगे।इस मंदिर में दो द्वार मौजूद हैं,उत्तर में मोक्ष द्वार और दक्षिण में स्वर्ग द्वार।मोक्ष द्वार या प्रवेश द्वार मंदिर को मुख्य बाजार से जोडता है और स्वर्ग द्वार मंदिर को गोमती नदी से जोडता हैं।

सोमनाथ मंदिर 

सोमनाथ मंदिर देवों के देव महादेव को समर्पित हैं।यह मंदिर गुजरात के वेरावल बंदरगाह से कुछ ही दूर प्रभास पाटन में स्थित हैं।इस मंदिर का निर्माण स्वयं चंद्रदेव ने किया था।जिसका उल्लेख ऋग्वेद में स्पष्ट हैं।चंद्रदेव का एक नाम सोम भी हैं,उन्होंने यहां भगवान शिव को अपना नाथ मानकर तपस्या की थी इसलिए,मंदिर का नाम सोमनाथ पडा।सोमनाथ मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से प्रथम ज्योतिर्लिंग माना जाता हैं।यह मंदिर हिन्दू धर्म के उत्थान-पतन के इतिहास का प्रतीक रहा है।

अत्यन्त वैभवशाली होने के कारण महमूद गजनवी समेत अनेक मुस्लिम आक्रमणकारियों ने कई बार यह मंदिर को नष्ट किया हैं और हर बार उतनी ही विशालता से इसका पुननिर्माण किया गया।वर्तमान की सात मंजिला मंदिर का निर्माण वर्ष 1950 में लोहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने करवाया था।जिसका निर्माण चालुक्य शैली में किया गया है।सोमनाथ मंदिर का संचालन और व्यवस्था का प्रबंधन सोमनाथ ट्रस्ट द्वारा किया जा रहा है। 

यह मंदिर गर्भगृह,सभामंडप और नृत्यमंडप- तीन प्रमुख भागों में विभाजित है।इस मंदिर का शिखर 150 फुट ऊंचा है।इसके शिखर पर स्थित कलश का भार दस टन है और इसकी ध्वजा 27 फुट ऊंची है।लोककथाओं के अनुसार यहीं पर श्रीकृष्ण ने देहत्यागा था।यहां तीन नदियों हिरण,कपिला और सरस्वती का महासंगम होता है। 

अक्षरधाम मंदिर

अक्षरधाम मंदिर गुजरात के गांधीनगर में स्थित हैं।यह मंदिर भगवान स्वामीनारायण को समर्पित हैं।इस मंदिर का निर्माण स्वामीनारायण संप्रदाय द्वारा कराया गया।अति वैभवशाली मंदिर का निर्माण 6000 गुलाबी बलुआ पत्थरों से हुआ हैं।मंदिर 32 मीटर ऊंचा,73 मीटर लंबा और 39 मीटर चौडा है।मंदिर में वास्तुकला,कलाकार्यों,शिक्षा,अनुसंधान और प्रदर्शनियों को एक साथ देखा जा सकता हैं।यह मंदिर गुजरात के प्रमुख तथा प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में गिना जाता है।

अंबाजी मंदिर

अंबाजी मंदिर गुजरात-राजस्थान सीमा पर बनासकांठा जिले के दांता तालुका में स्थित हैं।यह मंदिर देश के सबसे प्राचीन मंदिर में से एक हैं।माना जाता है कि यह मंदिर लगभग 1200 साल पुराना है।इस मंदिर के जीर्णोद्धार का काम 1975 से शुरू हुआ था और तब से अब तक जारी है।श्वेत संगमरमर से निर्मित यह मंदिर बेहद भव्य है।मंदिर का शिखर एक सौ तीन फुट ऊंचा है।शिखर पर 358 स्वर्ण कलश सुसज्जित हैं।

मां भवानी के 51 शक्तिपीठों में से एक इस मंदिर के प्रति मां के भक्तों में अपार श्रद्धा है।कहा जाता है कि यहां मां सती का ह्दय गिरा था,जिसका उल्लेख तंत्र चूडामणि में भी मिलता है।इस मंदिर में मां की गर्भगृह में कोई प्रतिमा नहीं हैं।यहां मां का एक श्रीयंत्र स्थापित है।इस श्रीयंत्र को कुछ इस प्रकार सजाया जाता है कि देखने वाले को लगे कि मां अंबे यहां साक्षात विराजी हैं।माताजी की पूजा आखों में पट्टी बांधकर की जाती हैं।यहां पर फोटो लेनी की परमिशन नहीं हैं।

मंदिर से लगभग 3 किमी.की दूरी पर गब्बर नामक एक पहाड भी है,जहां देवी मां का प्राचीन मंदिर स्थापित है।ऐसा माना जाता है कि यहां एक पत्थर पर मां के पदचिह्न एवं रथचिह्र बने हैं।अंबा जी के दर्शन के बाद,श्रद्धालु गब्बर पहाडी पर स्थित इस मंदिर में जरूर जाते हैं।अंबाजी मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां पर भगवान श्रीकृष्ण का मुंडन संस्कार संपन्न हुआ था।वहीं भगवान राम भी मां शक्ति की उपासना के लिए यहां आ चुके हैं। 

कालीका माता मंदिर चंपानेर-पावागढ

कालीका माता का मंदिर पंचमहल जिले के हालोल तशहिल से 7 किमी.दूर 1525 फीट ऊंची पावागढ की पहाडी पर मौजूद हैं।पावागढ पहाडी की शरुआत चंपानेर से होती हैं।यहां पर कालिका माता की दक्षिण मुखी प्रतिमा स्थापित हैं।यह मंदिर माता के पवित्र शक्तिपीठों में से एक हैं।ऐसा कहा जाता हैं की,यहां पर मां सती के दाहिने पैर का अंगूठा गिरा था।कालिका माता का मंदिर यूनेस्को के विश्व विरासत स्थल की सूची में सामिल हैं।

कहा जाता हैं की यहां पर विश्वामित्र ने मां काली की तपस्या की थी।यह भी माना जाता हैं की काली माता की मूर्ति गुरु विश्वामित्र ने ही स्थापित की थी।यहां बहने वाली नदी का नामकरण भी गुरु विश्वामित्र के नाम पर विश्वामित्री किया गया।

रुक्मणि मंदिर 

रुक्मणि मंदिर द्वारका में स्थित हैं।यह मंदिर द्वारकाधीश मंदिर से 2 किमी.की दूरी पर हैं।रुक्मणि मंदिर भगवान श्री कृष्ण की पत्नी रुक्मणि को समर्पित हैं।रुक्मिणी को लक्ष्मी का अवतार भी माना जाता है।मूल मंदिर लगभग 2,500 साल पहले बनाया गया था।वर्तमान मंदिर 12 वीं शताब्दी में स्थापित किया गया हैं।

रुक्मिणी मंदिर के शीर्ष पर एक ऊंचा शिखर है जिस पर प्राचीन नक्काशियां अब भी स्पष्ट देखी जा सकती हैं।रुक्मिणी मंदिर का बाहरी आधारभूत संरचना विभिन्न देवताओं और देवियों की खूबसूरत छवियों के साथ मूर्तिबद्ध है।मंदिर के भीतर के अधिकांश भाग में माँ रुक्मणि जी की मूर्ति स्थापित हैं।

सूर्य मंदिर मोढेरा 

सूर्य मंदिर गुजरात के मेहसाना जिले के मोढेरा नाम के गांव में पुष्पावती नदी के किनारे स्थापित हैं।पाटन से 30 किमी.की दूरी पर स्थित यह मंदिर सूर्य देव को समर्पित हैं।इस मंदिर का निर्माण सोलंकी वंश के राजा भीमदेव प्रथम द्वारा सन्  1026-1027 ई. में किया गया था।यह सूर्यमंदिर विलक्षण स्थापत्य और शिल्प कला का बेजोड उदाहरण है।इस मंदिर में सूर्य कुंड,सभा मंडप और गुडा मंडप जैसे तीन हिस्सों में विभाजित किया गया है।

मंदिर का निर्माण कुछ इस प्रकार किया गया,कि सूर्योदय होने पर सूर्य की पहली किरण मंदिर के गर्भगृह को रोशन करे।मंदिर के निर्माण में चुने का इस्तमाल नहीं किया गया हैं।इस मंदिर की देख - रेख भारतीय पुरातत्व विभाग करता हैं।यूनेस्को ने इसे वर्ष 2014 में,विश्व धरोहर स्थलों की सूची में जगह दी,तब से मोढेरा स्थित सूर्य मंदिर वर्ल्ड हेरिटेज का हिस्सा है। 

निष्कर्ष

इस लेख में गुजरात के कुछ धार्मिक स्थल के बारे में बताया गया हैं।आपको यह लेख पसंद आया होगा।इस लेख में जो भी जानकारी दी गई हैं उसमे कोई भूल आपको नजर आए तो आप हमे अवगत करा सकते हो।हमारा लेख पढने के लिए धन्यवाद...






 

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